वाल्मीकि रामायण 6.78.20
तानि दृष्ट्वा निमित्तानि राक्षसा वीर्यवत्तमाः।अचिन्त्य निर्गताः सर्वे यत्र तौ रामलक्ष्मणौ॥
tāni dṛṣṭvā nimittāni rākṣasā vīryavattamāḥ |acintya nirgatāḥ sarve yatra tau rāmalakṣmaṇau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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