वाल्मीकि रामायण 6.78.3
गच्छ पुत्र मया ऽ ऽज्ञप्तो बलेनाभिसमन्वितः।राघवं लक्ष्मणं चैव जहि तांश्च वनौकसः॥
gaccha putra mayā ' 'jñapto balenābhisamanvitaḥ |rāghavaṃ lakṣmaṇaṃ caiva jahi tāṃśca vanaukasaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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