वाल्मीकि रामायण 6.79.11
यत्तदा दण्डकारण्ये पितरं हतवान् मम।मदग्रतः स्वकर्मस्थं दृष्ट्वा रोषो ऽभिवर्धते॥
yattadā daṇḍakāraṇye pitaraṃ hatavān mama |madagrataḥ svakarmasthaṃ dṛṣṭvā roṣo 'bhivardhate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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