वाल्मीकि रामायण 6.80.19
आपपाताथ सङ्क्रुद्धो दशग्रीवेण चोदितः।तीक्ष्णकार्मुकनाराचैस्तीक्ष्णस्त्विन्द्ररिपू रणे॥
āpapātātha saṅkruddho daśagrīveṇa coditaḥ |tīkṣṇakārmukanārācaistīkṣṇastvindraripū raṇe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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