वाल्मीकि रामायण 6.80.20
स ददर्श महावीर्यो नागौ त्रिशिरसाविव।सृजन्ताविषुजालानि वीरौ वानरमध्यगौ॥
sa dadarśa mahāvīryo nāgau triśirasāviva |sṛjantāviṣujālāni vīrau vānaramadhyagau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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