वाल्मीकि रामायण 6.80.3
जहि वीर महावीर्यौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ।अदृश्यो दृश्यमानो वा सर्वथा त्वं बलाधिकः॥
jahi vīra mahāvīryau bhrātarau rāmalakṣmaṇau |adṛśyo dṛśyamāno vā sarvathā tvaṃ balādhikaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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