वाल्मीकि रामायण 6.80.32
यतो हि ददृशाते तौ शरान्निपततः शितान्।ततस्तु तौ दाशरथी ससृजाते ऽस्त्रमुत्तमम्॥
yato hi dadṛśāte tau śarānnipatataḥ śitān |tatastu tau dāśarathī sasṛjāte 'stramuttamam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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