वाल्मीकि रामायण 6.80.7
शस्त्राणि शरपत्राणि समिधो ऽथ विभीतकाः।लोहितानि च वासांसि स्रुवं कार्ष्णायसं तथा॥
śastrāṇi śarapatrāṇi samidho 'tha vibhītakāḥ |lohitāni ca vāsāṃsi sruvaṃ kārṣṇāyasaṃ tathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें