वाल्मीकि रामायण 6.82.1
श्रुत्वा तु भीमनिर्ह्रादं शक्राशनिसमस्वनम्।वीक्षमाणा दिशः सर्वा दुद्रुवुर्वानरर्षभाः॥
śrutvā tu bhīmanirhrādaṃ śakrāśanisamasvanam |vīkṣamāṇā diśaḥ sarvā dudruvurvānararṣabhāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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