वाल्मीकि रामायण 6.82.10
तामापतन्तीं दृष्ट्वैव रथः सारथिना तदा।विधेयाश्वसमायुक्तः सुदूरमपवाहितः॥
tāmāpatantīṃ dṛṣṭvaiva rathaḥ sārathinā tadā |vidheyāśvasamāyuktaḥ sudūramapavāhitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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