वाल्मीकि रामायण 6.82.7
स तैर्वानरमुख्यैश्च हनुमान् सर्वतो वृतः।हुताशन इवार्चिष्मानदहच्छत्रुवाहिनीम्॥
sa tairvānaramukhyaiśca hanumān sarvato vṛtaḥ |hutāśana ivārciṣmānadahacchatruvāhinīm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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