वाल्मीकि रामायण 6.83.2
सौम्य नूनं हनुमता क्रियते कर्म दुष्करम्।श्रूयते हि यथा भीमः सुमहानायुधस्वनः॥
saumya nūnaṃ hanumatā kriyate karma duṣkaram |śrūyate hi yathā bhīmaḥ sumahānāyudhasvanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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