वाल्मीकि रामायण 6.83.33
अर्थेन हि वियुक्तस्य पुरुषस्याल्पतेजसः।व्युच्छिद्यन्ते क्रियाः सर्वा ग्रीष्मे कुसरितो यथा॥
arthena hi viyuktasya puruṣasyālpatejasaḥ |vyucchidyante kriyāḥ sarvā grīṣme kusarito yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें