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वाल्मीकि रामायण 6.85.17
विभीषणवचः श्रुत्वा राघवो वाक्यमब्रवीत्॥
vibhīṣaṇavacaḥ śrutvā rāghavo vākyamabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंविभीषणवचः श्रुत्वा राघवो वाक्यमब्रवीत्॥
vibhīṣaṇavacaḥ śrutvā rāghavo vākyamabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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