वाल्मीकि रामायण 6.85.3
नैर्ऋताधिपते वाक्यं यदुक्तं ते विभीषण।भूयस्तच्छ्रोतुमिच्छामि ब्रूहि यत्ते विवक्षितम्॥
nairṛtādhipate vākyaṃ yaduktaṃ te vibhīṣaṇa |bhūyastacchrotumicchāmi brūhi yatte vivakṣitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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