वाल्मीकि रामायण 6.85.31
वानराणां सहस्रैस्तु हनुमान् बहुभिर्वृतः।विभीषणश्च सामात्यस्तदा लक्ष्मणमन्वगात्॥
vānarāṇāṃ sahasraistu hanumān bahubhirvṛtaḥ |vibhīṣaṇaśca sāmātyastadā lakṣmaṇamanvagāt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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