वाल्मीकि रामायण 6.85.5
यथाज्ञप्तं महाबाहो त्वया गुल्मनिवेशनम्।तत्तथा ऽनुष्ठितं वीर त्वद्वाक्यसमनन्तरम्॥
yathājñaptaṃ mahābāho tvayā gulmaniveśanam |tattathā 'nuṣṭhitaṃ vīra tvadvākyasamanantaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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