वाल्मीकि रामायण 6.86.21
शितशूलधराः शूलैरसिभिश्चासिपाणयः।शक्तिभिः शक्तिहस्ताश्च पट्टिशैः पट्टिशायुधाः॥
śitaśūladharāḥ śūlairasibhiścāsipāṇayaḥ |śaktibhiḥ śaktihastāśca paṭṭiśaiḥ paṭṭiśāyudhāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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