वाल्मीकि रामायण 6.87.17
निरनुक्रोशता चेयं यादृशी ते निशाचर।स्वजनेन त्वया शक्यं परुषं रावणानुज॥
niranukrośatā ceyaṃ yādṛśī te niśācara |svajanena tvayā śakyaṃ paruṣaṃ rāvaṇānuja ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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