वाल्मीकि रामायण 6.87.3
नीलजीमूतसङ्काशं न्यग्रोधं भीमदर्शनम्।तेजस्वी रावणभ्राता लक्ष्मणाय न्यवेदयत्॥
nīlajīmūtasaṅkāśaṃ nyagrodhaṃ bhīmadarśanam |tejasvī rāvaṇabhrātā lakṣmaṇāya nyavedayat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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