वाल्मीकि रामायण 6.88.2
उद्यतायुधनिस्त्रिंशो रथे सुसमलङ्कृते।कालाश्वयुक्ते महति स्थितः कालान्तकोपमः॥
udyatāyudhanistriṃśo rathe susamalaṅkṛte |kālāśvayukte mahati sthitaḥ kālāntakopamaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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