वाल्मीकि रामायण 6.89.23
सुदीर्घकालं तौ वीरावन्योन्यं निशितैः शरैः।ततक्षतुर्महात्मानौ रणकर्मविशारदौ॥
sudīrghakālaṃ tau vīrāvanyonyaṃ niśitaiḥ śaraiḥ |tatakṣaturmahātmānau raṇakarmaviśāradau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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