वाल्मीकि रामायण 6.90.2
तौ द्रष्टुकामः सङ्ग्रामे परस्परगतौ बली।शूरः स रावणभ्राता तस्थौ सङ्ग्राममूर्धनि॥
tau draṣṭukāmaḥ saṅgrāme parasparagatau balī |śūraḥ sa rāvaṇabhrātā tasthau saṅgrāmamūrdhani ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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