वाल्मीकि रामायण 6.90.39
अथ राक्षससिंहस्य कृष्णान् कनकभूषणान्।शरैश्चतुर्भिः सौमित्रिर्विव्याध चतुरो हयान्॥
atha rākṣasasiṃhasya kṛṣṇān kanakabhūṣaṇān |śaraiścaturbhiḥ saumitrirvivyādha caturo hayān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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