वाल्मीकि रामायण 6.91.23
मुक्तमिन्द्रजिता तत्तु शरवर्षमरिन्दमः।अवारयदसम्भ्रान्तो लक्ष्मणः सुदुरासदम्॥
muktamindrajitā tattu śaravarṣamarindamaḥ |avārayadasambhrānto lakṣmaṇaḥ sudurāsadam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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