वाल्मीकि रामायण 6.91.32
ते तस्य वज्रप्रतिमाः शराः सर्पविषोपमाः।विलयं जग्मुराहत्य कवचं काञ्चनप्रभम्॥
te tasya vajrapratimāḥ śarāḥ sarpaviṣopamāḥ |vilayaṃ jagmurāhatya kavacaṃ kāñcanaprabham ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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