वाल्मीकि रामायण 6.91.39
ततः समरकोपेन संयुक्तो रावणात्मजः।विभीषणं त्रिभिर्बाणैर्विव्याध वदने शुभे॥
tataḥ samarakopena saṃyukto rāvaṇātmajaḥ |vibhīṣaṇaṃ tribhirbāṇairvivyādha vadane śubhe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें