वाल्मीकि रामायण 6.91.43
तामापतन्तीं सम्प्रेक्ष्य सुमित्रानन्दवर्धनः।चिच्छेद निशितैर्बाणैर्दशधा सा ऽपतद्भुवि॥
tāmāpatantīṃ samprekṣya sumitrānandavardhanaḥ |ciccheda niśitairbāṇairdaśadhā sā 'patadbhuvi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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