वाल्मीकि रामायण 6.91.90
ववृषुः पुष्पवर्षाणि तदद्भुतमभूत्तदा।प्रशशंसुर्हते तस्मिन् राक्षसे क्रूरकर्मणि॥
vavṛṣuḥ puṣpavarṣāṇi tadadbhutamabhūttadā |praśaśaṃsurhate tasmin rākṣase krūrakarmaṇi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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