वाल्मीकि रामायण 6.91.93
ततो ऽभ्यनन्दन् संहृष्टाः समरे हरियूथपाः।तमप्रतिबलं दृष्ट्वा हतं नैर्ऋतपुङ्गवम्॥
tato 'bhyanandan saṃhṛṣṭāḥ samare hariyūthapāḥ |tamapratibalaṃ dṛṣṭvā hataṃ nairṛtapuṅgavam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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