वाल्मीकि रामायण 6.91.97
अन्योन्यं च समाश्लिष्य कपयो हृष्टमानसाः।चक्रुरुच्चावचगुणा राघवाश्रयजाः कथाः॥
anyonyaṃ ca samāśliṣya kapayo hṛṣṭamānasāḥ |cakruruccāvacaguṇā rāghavāśrayajāḥ kathāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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