वाल्मीकि रामायण 6.92.22
ये चाप्यन्ये ऽत्र युध्यन्ति सशल्या व्रणिनस्तथा।ते ऽपि सर्वे प्रयत्नेन क्रियन्तां सुखिनस्त्वया॥
ye cāpyanye 'tra yudhyanti saśalyā vraṇinastathā |te 'pi sarve prayatnena kriyantāṃ sukhinastvayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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