वाल्मीकि रामायण 6.92.9
स तं शिरस्युपाघ्राय लक्ष्मणं लक्ष्मिवर्धनम्।लज्जमानं बलात् स्नेहादङ्कमारोप्य वीर्यवान्॥
sa taṃ śirasyupāghrāya lakṣmaṇaṃ lakṣmivardhanam |lajjamānaṃ balāt snehādaṅkamāropya vīryavān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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