वाल्मीकि रामायण 6.95.10
तन्निमित्तमिदं वैरं रावणेन कृतं महत्।वधाय सीता सा ऽ ऽनीता दशग्रीवेण रक्षसा॥
tannimittamidaṃ vairaṃ rāvaṇena kṛtaṃ mahat |vadhāya sītā sā ' 'nītā daśagrīveṇa rakṣasā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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