वाल्मीकि रामायण 6.95.23
रुद्रो वा यदि वा विष्णुर्महेन्द्रो वा शतक्रतुः।हन्ति नो रामरूपेण यदि वा स्वयमन्तकः॥
rudro vā yadi vā viṣṇurmahendro vā śatakratuḥ |hanti no rāmarūpeṇa yadi vā svayamantakaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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