वाल्मीकि रामायण 6.95.24
हतप्रवीरा रामेण निराशा जीविते वयम्।अपश्यन्तो भयस्यान्तमनाथा विलपामहे॥
hatapravīrā rāmeṇa nirāśā jīvite vayam |apaśyanto bhayasyāntamanāthā vilapāmahe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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