वाल्मीकि रामायण 6.95.32
अद्यप्रभृति लोकांस्त्रीन् सर्वे दानवराक्षसाः।भयेन प्रावृता नित्यं विचरिष्यन्ति शाश्वतम्॥
adyaprabhṛti lokāṃstrīn sarve dānavarākṣasāḥ |bhayena prāvṛtā nityaṃ vicariṣyanti śāśvatam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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