वाल्मीकि रामायण 6.95.39
प्राप्तकालं कृतं तेन पौलस्त्येन महात्मना।यत एव भयं दृष्टं तमेव शरणं गतः॥
prāptakālaṃ kṛtaṃ tena paulastyena mahātmanā |yata eva bhayaṃ dṛṣṭaṃ tameva śaraṇaṃ gataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें