वाल्मीकि रामायण 6.98.2
स्वबलस्य विघातेन विरूपाक्षवधेन च।बभूव द्विगुणं क्रुद्धो रावणो राक्षसाधिपः॥
svabalasya vighātena virūpākṣavadhena ca |babhūva dviguṇaṃ kruddho rāvaṇo rākṣasādhipaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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