वाल्मीकि रामायण 6.99.12
जाम्बवन्तं गवाक्षं च स दृष्ट्वा शरपीडितौ।जग्राह परिघं घोरमङ्गदः क्रोधमूर्च्छितः॥
jāmbavantaṃ gavākṣaṃ ca sa dṛṣṭvā śarapīḍitau |jagrāha parighaṃ ghoramaṅgadaḥ krodhamūrcchitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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