वाल्मीकि रामायण 6.99.17
स तु क्रुद्धो महावेगो महापार्श्वो महाद्युतिः।करेणैकेन जग्राह सुमहान्तं परश्वधम्॥
sa tu kruddho mahāvego mahāpārśvo mahādyutiḥ |kareṇaikena jagrāha sumahāntaṃ paraśvadham ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें