वाल्मीकि रामायण 7.1.10
नयेङ्गितज्ञः सद्वृत्तो दक्षो धैर्यसमन्वितः ।स रामं दृश्य सहसा पूर्णचन्द्रसमप्रभम्॥
nayeṅgitajñaḥ sadvṛtto dakṣo dhairyasamanvitaḥ |sa rāmaṃ dṛśya sahasā pūrṇacandrasamaprabham ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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