वाल्मीकि रामायण 7.1.19
सधनुस्त्वं हि लोकांस्त्रीन्विजयेथा न संशयः ।दिष्ट्या त्वया हतो राम रावणो राक्षसेश्वरः॥
sadhanustvaṃ hi lokāṃstrīnvijayethā na saṃśayaḥ |diṣṭyā tvayā hato rāma rāvaṇo rākṣaseśvaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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