वाल्मीकि रामायण 7.1.41
शक्यं यदि मया श्रोतुं न खल्वाज्ञापयामि वः ।यदि गुह्यं न चेद्वक्तुं श्रोतुमिच्छामि कथ्यताम्॥
śakyaṃ yadi mayā śrotuṃ na khalvājñāpayāmi vaḥ |yadi guhyaṃ na cedvaktuṃ śrotumicchāmi kathyatām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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