वाल्मीकि रामायण 7.100.13
अन्यस्य न गतिस्तत्र देशः परमशोभनः ।रोचतां ते महाबाहो नाहं त्वामहितं वदे॥
anyasya na gatistatra deśaḥ paramaśobhanaḥ |rocatāṃ te mahābāho nāhaṃ tvāmahitaṃ vade ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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