वाल्मीकि रामायण 7.100.18
निवेश्य ते पुरवरे आत्मजौ सन्निवेश्य च ।आगमिष्यति मे भूयः सकाशमतिधार्मिकः॥
niveśya te puravare ātmajau sanniveśya ca |āgamiṣyati me bhūyaḥ sakāśamatidhārmikaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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