वाल्मीकि रामायण 7.100.20
नक्षत्रेण च सौम्येन पुरस्कृत्याङ्गिरस्सुतम् ।भरतः सह सैन्येन कुमाराभ्यां विनिर्ययौ॥
nakṣatreṇa ca saumyena puraskṛtyāṅgirassutam |bharataḥ saha sainyena kumārābhyāṃ viniryayau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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