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वाल्मीकि रामायण 7.100.2
दश चाश्वसहस्राणि प्रीतिदानमनुत्तमम्॥
daśa cāśvasahasrāṇi prītidānamanuttamam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंदश चाश्वसहस्राणि प्रीतिदानमनुत्तमम्॥
daśa cāśvasahasrāṇi prītidānamanuttamam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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