वाल्मीकि रामायण 7.100.3
कम्बलानि च रत्नानि चित्रवस्त्रमथोत्तमम् ।रामाय प्रददौ राजा शुभान्याभरणानि च॥
kambalāni ca ratnāni citravastramathottamam |rāmāya pradadau rājā śubhānyābharaṇāni ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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