वाल्मीकि रामायण 7.102.16
एवं वर्षसहस्राणि दश तेषां ययुस्तदा ।धर्मे प्रयतमानानां पौरकार्येषु नित्यदा॥
evaṃ varṣasahasrāṇi daśa teṣāṃ yayustadā |dharme prayatamānānāṃ paurakāryeṣu nityadā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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